डेंगू नियंत्रण और बचाव में होगी सामुदायिक भागीदारी, आमजन के अनुभव बनेंगे राष्ट्रीय स्तर के चार्टर का हिस्सा





गोरखपुर। क्षेत्रीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आरएमआरसी) और स्वयंसेवी संस्था ड्रग्स फॉर नेगलेक्टेड डिजीज इनिशिएटिव (डीएनडीआई) ने विषय विशेषज्ञों, समुदाय और हितधारकों को डेंगू के मौसम के पहले एक मंच पर लाने की पहल की है। इसी कड़ी में चरगांवा ब्लॉक सभागार में डेंगू जनजागरूकता कार्यशाला ‘सामुदायिक भागीदारी, सबकी जिम्मेदारी’ का आयोजन कर बीमारी, बचाव और सामुदायिक भूमिका के बारे में विस्तार से चर्चा की गयी। कार्यशाला के सभी प्रतिभागियों और हितधारकों से उनके व्यावहारिक अनुभव भी प्राप्त किये गये, जिनकी मदद से राष्ट्रीय स्तर का चार्टर बनाया जाएगा। आगामी मई 2024 को नई दिल्ली में डेंगू संबंधित प्रस्तावित राष्ट्रीय कार्यक्रम में यह चार्टर प्रमुख भूमिका निभाएगा। कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों ने अपने अनुभव साझा किया और बीमारी के विभिन्न पक्षों के बारे में सवाल भी पूछे। कार्यक्रम में पहुंचे गोरखपुर मंडल के अपर निदेशक स्वास्थ्य डॉ नरेंद्र प्रसाद गुप्ता ने कहा कि विशेष संचारी रोग नियंत्रण अभियान और दस्तक पखवाड़े के दौरान मच्छरों के स्रोतों का पता लगाने और उन्हें नष्ट करने पर विशेष जोर है। लोगों को यह संदेश दिया जाता है कि बुखार होने पर तत्काल नजदीकी अस्पताल में जांच कराएं। इस तरह मच्छरजनित बीमारियों से बचाव पर सरकारी तंत्र प्रयास कर रहा है। आरएमआरसी के निदेशक डॉ कृष्णा पांडेय ने सामुदायिक सहभागिता पर जोर दिया और कहा कि डेंगू की समय से पहचान और चिकित्सक से सम्पर्क बेहद जरूरी है। इस बीमारी की प्रसार दर हमेशा से चिंता का विषय रही है। इससे बचाव के उपाय में स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं के साथ साथ समाज के सभी हितधारकों की अहम भूमिका है। आरएमआरसी के पूर्व निदेशक डॉ रजनीकांत ने कहा कि डेंगू का कोई इलाज नहीं होता है। इसका सिर्फ लाक्षणिक उपचार संभव है। संभावित डेंगू की समय से पहचान कर चिकित्सकीय हस्तक्षेप किया जाना मरीज की जीवनरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। नेशनल वेक्टर बॉर्न डिजीज कंट्रोल प्रोग्राम के पूर्व निदेशक डॉ पीके श्रीवास्तव ने प्रस्तुति के जरिये डेंगू के कारण और बचाव के उपायों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि डेंगू से बचाव के लिए लोगों तक सही जानकारी पहुंचाना बहुत जरूरी है। डेंगू मरीज का समय से सही जगह पर संदर्भन, इससे होने वाली जटिलताओं को रोकने में कारगर है। वेक्टर बॉर्न विशेषज्ञ डॉ बीएन नागपाल ने कहा कि डेंगू मादा मच्छर का काटने से होता है। यह मच्छर दिन के समय काटता है और इसे पनपने के लिए थोड़ा सा साफ पानी भी पर्याप्त है। बीआरडी मेडिकल कॉलेज के चिकित्सक डॉ राजकिशोर सिंह ने कहा कि तेज बुखार और जोडों में दर्द इस बीमारी के प्रमुख लक्षण हैं। डेंगू के गंभीर मामलों में पल्स रेट 120 तक चला जाता है, रुक-रुककर बुखार आता है और प्लेटलेट दस हजार से नीचे चला जाता है। इस मौके पर मंडलीय किट विज्ञानी डॉ वीके श्रीवास्तव, डीएमओ अंगद सिंह, एडीएमओ राजेश चौबे, डॉ धनंजय कुशवाहा, सत्यप्रकाश सिंह, मनोज कुमार, जेई एईएस कंसल्टेंट डॉ सिद्धेश्वरी आदि रहे।



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