विश्व टीबी दिवस पर टीबीमुक्त घोषित हुईं 299 ग्राम पंचायतें, विधायक व महापौर ने सभी गांवों के प्रधानों को सम्मानित कर बढ़ाया हौसला





गोरखपुर। जिले में 299 ग्राम पंचायतें टीबी मुक्त हो चुकी हैं। महापौर डॉ मंगलेश श्रीवास्तव, ग्रामीण विधायक विपिन सिंह और बांसगांव के विधायक डॉ विमलेश पासवान के हाथों सम्मान पाकर इन गांवों के प्रधान शनिवार को उत्साह से लबरेज दिखे। एडी हेल्थ डॉ बीएम राव, सीएमओ डॉ आशुतोष कुमार दूबे और डीटीओ डॉ गणेश यादव समेत राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम से जुड़े उच्चाधिकारियों की मौजूदगी में ग्राम प्रधानों ने संकल्प लिया कि वह गोरखपुर को टीबी मुक्त बनाने में योगदान देंगे। शासन के निर्देश पर 24 मार्च को पड़ने वाले विश्व टीबी दिवस संबंधी यह आयोजन एनेक्सी भवन सभागार में शनिवार को आयोजित किया गया। महापौर ने कहा कि हमे यह सुनिश्चित करना होगा कि टीबी मरीज की दवा बीच में बंद न होने पाए। एक बार दवा बंद होने पर टीबी मरीजों में दवाओं के प्रति रेसिस्टेंट पैदा हो जाता है और उनका इलाज जटिल हो जाता है। हमारे आसपास कोई भी नया मरीज निकलता है तो उसे निरंतर दवा लेने के लिए प्रेरित करें, जब तक कि वह ठीक न हो जाए। ग्रामीण विधायक ने कहा कि टीबी एक ऐसी बीमारी है जो किसी को भी हो सकती है। केंद्र और राज्य सरकार टीबी उन्मूलन के लिए प्रतिबद्ध है। इस मुहिम को सफल बनाने में ग्राम पंचायतों की अहम भूमिका है। हमे संकल्प लेना होगा कि जिले की सभी 1350 ग्राम पंचायतों को टीबी मुक्त बनाएंगे। बांसगांव विधायक ने कहा कि अगर किसी को लगातार खांसी आ रही है तो उसे टीबी जांच और पूरा इलाज करवाने के लिए प्रेरित करना होगा। जांच और इलाज की पूरी सुविधा निःशुल्क है। टीबी के बारे में लोगों तक सम्पूर्ण जानकारी पहुंच सके, इसके लिए सभी ग्राम सचिवालयों पर टोल फ्री नंबर अंकित कराया जाए। अतिथियों का स्वागत और विषय प्रवर्तन करते हुए मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने बताया कि पिछले वर्ष नौ ग्राम पंचायतें टीबी मुक्त हुई थीं। उन्होंने ग्राम प्रधानों से अपील की कि इस वर्ष अधिकाधिक ग्राम पंचायतों को टीबी मुक्त करवाने में सहयोग करें। मरीजों तक यह जानकारी पहुंचाएं कि जांच के बाद बीमारी की पहचान होते ही मरीज को निक्षय पोर्टल पर पंजीकृत किया जाता है। पंजीकरण के 15 दिनों के भीतर तीन हजार रुपये और उपचार के 84 दिन के पश्चात तीन हजार रुपये मरीज के खाते में दिये जाते हैं, ताकि वह इलाज के दौरान सुपोषण से भरपूर खानपान रख सके। टीबी की जांच और इलाज निःशुल्क है। डीटीओ ने बताया कि जिलाधिकारी, सीडीओ और सीएमओ के नेतृत्व में सौ दिवसीय टीबी उन्मूलन अभियान चलाया गया, जिसके सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। इस दौरान करीब चार हजार से अधिक नये टीबी मरीज खोजे गये। उन्होंने अपील किया कि लोग जरूरतमंद टीबी मरीजों को गोद लेने के लिए सामने आए। मरीजों को गोद लेकर पोषण में सहयोग और मानसिक संबल देने से वह जल्दी ठीक होते हैं। जांच और सम्पूर्ण उपचार से टीबी ठीक हो जाती है। इस दौरान राष्ट्रीय टीबी उन्मलून कार्यक्रम से जुड़े कर्मियों को भी सम्मानित किया गया। जनप्रतिनिधियों ने सेवानिवृत्त हो रहे सीएमओ की प्रशंसा की और उन्हें कार्यक्रम के दौरान सम्मानित भी किया गया। इस मौके पर प्रधान संघ अध्यक्ष, आरटीपीएयू प्रतिनिधि डॉ एनके द्विवेद्वी, डॉ एएन त्रिगुण, डीएमओ अंगद सिंह, एसटीडीसी प्रतिनिधि डॉ अभिलाषा, डीडीटीओ डॉ विराट स्वरूप श्रीवास्तव, डीएचईआईओ केएन बरनवाल, पीपीएम समन्वयक अभय नारायण मिश्र, मिर्जा आफताब बेग, डीपीसी धर्मवीर प्रताप सिंह, वरिष्ठ कर्मी उपेंद्र, विनय, कवियित्री सरिता सिंह, राजेश सिंह, गोविंद, मयंक, कमलेश गुप्ता, पवन, महेंद्र, इंद्रनील, अभिनंदन आदि रहे।



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