अरे! समाजवादी पेंशन में इतना बड़ा घोटाला, सामान्य वर्ग की ‘धनी’ ग्राम प्रधान ने ओबीसी बनकर ले लिया पेंशन का लाभ





बहरियाबाद। सादात ब्लाक क्षेत्र के बिजहरी ग्राम पंचायत में वित्तीय वर्ष 2014-15 व 2015-16 में तत्कालीन ग्राम प्रधान व ब्लाक के कर्मचारियों की मिलीभगत से “समाजवादी पेंशन योजना“ में भारी धांधली का मामला प्रकाश में आया है। जिसमें शासनादेश की धज्जियां उड़ाते हुए वर्तमान महिला ग्राम प्रधान सत्यभामा पाण्डेय ने ओबीसी बनकर लाभ लिया तो गांव के एक पति-पत्नी दोनों ने पेंशन का लाभ उठाया। इतना ही नहीं एक ही जाति के 95 प्रतिशत लोगों को पात्रता सूची में डालकर लाभ दिया गया है जो जिले की वेबसाइट सूची में दर्ज है। जिसकी शिक़ायत पिछले दिनों बिजहरी गांव निवासी सुशील कुमार पाण्डेय ने जिलाधिकारी व मुख्य विकास अधिकारी को ईमेल कर किया है। गौरतलब है कि वित्तीय वर्ष 2014-15 व 2015-16 में समाजवादी पेंशन योजना के तहत कुल 49 लोगों में 46 ओबीसी व तीन अनुसूचित जाति के लाभार्थी को पात्र बनाया गया। जिसमें नियम-कानून को ताक पर रखकर एक ही जाति चौहान बिरादरी के लगभग 95 प्रतिशत लोगों को पात्र बनाकर लाभ दिया गया। इतना ही नहीं बल्कि गांव के राधेश्याम चौहान व उनकी पत्नी ममता चौहान दोनों को पात्र बना दिया गया। जबकि मानक के अनुसार परिवार का एक ही सदस्य लाभार्थी हो सकता है। हद तो तब हो गई जब सामान्य वर्ग की ब्राह्मण जाति की आर्थिक रूप से सम्पन्न व गांव की वर्तमान प्रधान सत्यभामा पाण्डेय को भी ओबीसी वर्ग का बनाकर लगातार दो वित्तीय वर्ष तक पेंशन का लाभ दिया गया। जो नाम जिले के वेबसाइट पर अंकित है। फिलहाल योगी सरकार ने समाजवादी पेंशन योजना पर रोक लगा दी है। इस बाबत सुशील कुमार पाण्डेय सहित अन्य ग्रामीणों ने मुख्य विकास अधिकारी सहित जिलाधिकारी से मांग किया है कि जांच कर योजना का लाभ उठा चुके अपात्रों से प्राप्त धनराशि वसूली जाए और इस गोरखधंधे में शामिल सभी कर्मचारियों व अधिकारियों के खिलाफ़ आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाये। गौरतलब है कि सरकारी मानक के तहत समाजवादी पेंशन अनुसूचित जाति एवं जन जाति के लिए 30 प्रतिशत, अल्पसंख्यक वर्ग के लिए 25 प्रतिशत व पिछड़ा व सामान्य वर्ग के लिए 45 प्रतिशत तक आरक्षित है। पूर्व सरकार ने इस योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्रों के लिए जो योग्यता निर्धारित की थी उनमें विधवा, विकलांग, वृद्धावस्था पेंशन से लाभार्थी न हो, बेरोजगारी भत्ता न प्राप्त कर रहा हो, परिवार में 0.5 हेक्टेयर संचित अथवा एक हेक्टेयर असंचित से अधिक भूमि न हो, परिवार में किसी प्रकार का मोटराइज्ड वाहन, मशीनीकृत कृषि उपकरण इत्यादि न हो। इसके अलावा इसकी पात्रता के लिए कोई भी सदस्य सरकारी, गैर सरकारी, एनजीओ, निजी संगठनों में नियमित वेतन भोगी कर्मचारी के साथ परिवार का कोई सदस्य आयकर दाता व पेंशन भोगी न होने का मानक निर्धारित किया गया था। इस बाबत मुख्य विकास अधिकारी हरिकेश चौरसिया से वार्ता करने पर उन्होंने कहा कि फिलहाल वो मीटिंग में हैं और अभी उनके पास इस तरह का मामला नहीं आया है।



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