सैदपुर : खतरे के निशान को विकराल गंगा ने किया पार, गोमती ने भी पार किया चेतावनी स्तर, एसडीएम ने प्रमुख घाटों की बैरिकेडिंग का दिया निर्देश





सैदपुर। गंगा नदी का जलस्तर एक बार फिर तेजी से बढ़ने लगा है। मंगलवार को गंगा का जलस्तर बढ़कर 63.290 मीटर तक पहुंच गया, जो खतरे के निशान से 0.185 मीटर ऊपर पहुंच चुका है। वर्तमान में गंगा का जलस्तर लगभग एक सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से बढ़ रहा है, जिससे तटवर्ती इलाकों में चिंता बढ़ गई है। वहीं गंगा की सहायक नदी गोमती का जलस्तर भी खतरे के निशान को पार कर गया है। दोनों नदियों के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड में है। बाढ़ की स्थिति का जायजा लेने के लिए उपजिलाधिकारी ज्योति चौरसिया ने मंगलवार को गंगा और गोमती नदी से प्रभावित गांवों एवं क्षेत्रों का लगातार दौरा किया। उन्होंने बाढ़ प्रभावित ग्रामीणों की सुरक्षा, राहत एवं बचाव व्यवस्था का निरीक्षण कर संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। एसडीएम सबसे पहले गंगा नदी की बाढ़ से प्रभावित पटना गांव पहुंचीं। वहां उन्होंने जलभराव और बाढ़ की स्थिति का निरीक्षण करते हुए ग्रामीणों की सुरक्षा एवं आवश्यक व्यवस्थाओं के संबंध में अधिकारियों को निर्देशित किया। इसके बाद वह गोमती नदी की बाढ़ से प्रभावित खरौना गांव पहुंचीं, जहां नदी के बढ़ते जलस्तर से प्रभावित क्षेत्रों का जायजा लिया। दोनों गांव में उन्होंने बाढ़ पीड़ितों के लिए बनाए गए शरणालयों की व्यवस्थाओं को भी परखा। इस दौरान ग्रामीणों के लिए आवश्यक संसाधन, पशुओं के लिए हरे चारे और अन्य जरूरी इंतजामों की जानकारी ली तथा संबंधित अधिकारियों को सभी व्यवस्थाएं दुरुस्त रखने के निर्देश दिए।इसके बाद एसडीएम सैदपुर नगर स्थित बूढ़ेनाथ महादेव घाट पहुंचीं। आज सुबह चोचकपुर में दो किशोरियों के डूबने की घटना के मद्देनजर जिलाधिकारी के निर्देश पर उन्होंने नगर पंचायत को बूढ़ेनाथ महादेव घाट पर तत्काल बैरिकेडिंग कराने के निर्देश दिए। साथ ही मंदिर प्रशासन से थोड़ी-थोड़ी देर में लाउडस्पीकर के माध्यम से श्रद्धालुओं और आम लोगों को सचेत करने के लिए कहा गया। उन्होंने निर्देश दिया कि लाउडस्पीकर से लगातार यह घोषणा कराई जाए कि श्नदी का पानी गहरा और खतरनाक है, इसलिए कोई भी व्यक्ति पानी के किनारे या नदी में जाने का प्रयास न करे।श् एसडीएम ने इसके बाद पक्का घाट और रंगमहल घाट का भी निरीक्षण किया। उन्होंने स्थानीय लोगों से पूर्व वर्षों में बाढ़ के दौरान इन घाटों की स्थिति के बारे में जानकारी ली। बढ़ते जलस्तर को देखते हुए दोनों घाटों पर भी बैरिकेडिंग कराने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि किसी भी व्यक्ति को नदी के नजदीक जाने से रोका जा सके। साथ ही रंगमहल घाट पर पानी के गहरा होने का चेतावनी बोर्ड लगवाने का निर्देश दिया। एसडीएम ने बताया कि बैरिकेडिंग के बाद उक्त संवेदनशील घाटों पर पुलिसकर्मियों की भी ड्यूटी लगाई जाएगी। एसडीएम ने कहा कि बाढ़ से प्रभावित लोगों की सुरक्षा सर्वाेच्च प्राथमिकता है और संभावित खतरे को देखते हुए प्रशासन द्वारा राहत एवं बचाव के लिए आवश्यक सभी कदम उठाए जा रहे हैं। गंगा और गोमती दोनों नदियों के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए प्रशासन ने तटवर्ती क्षेत्रों के लोगों से सतर्क रहने और नदी के किनारे जाने से बचने की अपील की है। इस मौके पर स्वास्थ्य टीम से डॉ बीके राय, लेखपाल परमानंद मौर्य, जयधनी आदि रहे।



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